Skip to main content

रूबरू

ये शायर जब भी लिखता है, शब्दों के मोती पीरो के लिखता है 
इस मोती के गहने की कीमत बेमोल है बाजारों में,
जिस हुस्न की ये फरमाइश हुयी, उस नूर में चाँद का अक्स दिखता है  ।


कहाँ मियां किस ख्याल में हो,
किसने कहा कि ये जनरेशन 'कबीर' ढूंढती है 
अब तो बस एक खींची हुई लकीर ढूंढती है ! 
#TikkaBhaat

टाटा बिड़ला के कारखाने से कमाए पैसे मकान बनाते हैं, 
केजीपी आओ, यहाँ हम इंसान बनाते हैं !
#Convo2013

Comments